आस्मां की छ्त पे, है अपनी दुनिया
खिलखिलाती जिसमे, है अपनी खुशियां
चांद की छलनी लिए, तारे चुनते है हम
जादुई है ये जहां, हैं ही कोइ हम
बन्दे हैं हम उसके, हमपे किस का जोर
उम्मीदो के सूरज, निकले चारो ओर
इरादे हैं फौलादी, हिम्मती हर कदम
अपने हाथों किस्म्त लिखने, आज चले हैं हम ।
आस्मां की छ्त पे, है अपनी दुनिया
खिलखिलाती जिसमे, है अपनी खुशियां
सूरज की पलको तले, धूप बनते है हम
जादुई है ये जहां, हैं ही कोइ हम
बन्दे हैं हम उसके, हमपे किस का जोर
उम्मीदो के सूरज, निकले चारो ओर
इरादे हैं फौलादी, हिम्मती हर कदम
अपने हाथों किस्म्त लिखने, आज चले हैं हम ।
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